स्पेशल 2029
अरे ई कौनो नई बात थोड़े है। गाँव-देहात से लेके फेसबुकिया शहर तक, हर जगहा अक्षय कुमार रूपी ठग अपना जाल बिछाए बैठा है। तनी सुनो। कुछ साल पहिले एक सिनेमा आया था, स्पेशल 26। उड़ी बाबा, का गजब का सिनेमा था। एक तो ठगों का गिरोह, ऊपर से धरम-करम ऐसा कि असली सीबीआई
Read Moreमैं आजाद हूं।
मैं आजाद हूँ । गाँव के पूरब टोले में पीपल का पुराना ठूंठ आज फिर बहस की वेदी बना हुआ था। सिरकाही धूप में मधेसर चा अपनी पुरानी लाठी पर दोनों हाथ टिकाए, खंखारते हुए बोले, अरे भइया, हम तो कहते हैं कि देस में अजादी का बयार बह रहा है। अब देखो न, हमारे ज़माने
Read Moreनियंत्रण : सृष्टि के संतुलन का अदृश्य सूत्र
नियंत्रण, सृष्टि संतुलन का मूल रहस्य है। जैसे-जैसे कलयुग गहराएगा इंसानियत, मानवता इतना अनियंत्रित हो जाएगा कि उस पर नियंत्रण हेतु सुपर क्वांटम युक्त कृत्रिम बुद्धिमता प्रणाली के मशीन ही एकमात्र उपाय है।
Read Moreआइए न हमरा बिहार में।
धरना नहीं, महामेला! सड़क किनारे का वह मैदान आज केवल धूल-धक्कड़ का ढेर नहीं था, उसमें लोकतंत्र की सुराही छलक रही थी। चारों तरफ गोंदली के पत्तों जैसी चंचल भीड़। यह कोई गुस्सा या विरोध का अखाड़ा नहीं था, ई तो गाँव-जवार का महापरब था। दिल्ली-पंजाब वाले जिसे
Read Moreधर्म क्या है ?
आस्था है ब्रह्मांड का अस्तित्व है धर्म जन्म के जीवन की दिशा दृष्टिकोण निर्धारण करने का मार्ग है या जन्म जीवन के सत्यार्थ बोध का सत्य है। धर्म ईश्वरीय सत्य का विज्ञान है या आचरण एव संस्कार निर्माण का पथ सिद्धांत है। सर्व प्रथम यह जानना आवश्यक है कि धर्म..
Read Moreविक्षिप्त हमारी संवेदना।
गर्मी की एक चिलचिलाती सुबह थी। मैं रोज़ की तरह मोहल्ले की चाय की दुकान पर खड़ा चाय की चुस्कियाँ ले रहा था। दुकान पर लोगों की भीड़ थी, राजनीति पर बहस चल रही थी और हर कोई अपने-अपने ज्ञान का प्रदर्शन करने में व्यस्त था। तभी फटे-पुराने कपड़ों में एक विक्षिप्त
Read Moreएक सफर -सौ तमाशे
एक सफर - सौ तमाशे मैं समय हूँ... रेलवे स्टेशन में लगे घड़ी का समय। आप मेरे समय को देख कर रेल के टाइम से आने का समय न मिलाए और न ही अपनी घड़ी को मिलाएं, मै रेलवे का समय हूं। मैंने राजाओं का उत्थान-पतन देखा है, साम्राज्यों को बनते-बिगड़ते देखा है, किंतु जो
Read Moreनियुक्ति पत्र का महाभारत।
नियुक्ति पत्र का महाभारत। हमारे यहां शिक्षक की नियुक्ति अब नौकरी नहीं रही, यह तपस्या बन चुका है। पहले ऋषि-मुनि जंगल में बैठकर भगवान को प्रसन्न करते थे, आज अभ्यर्थी साइबर कैफे, कोचिंग और कोर्ट-कचहरी के बीच बैठकर नियुक्ति पत्र क के लिए आयोग को प्रसन्न करने
Read Moreहाय रे बस (यात्रा संस्मरण)
जीवन में कुछ यात्राएँ आदमी को अनुभव देती हैं, कुछ ज्ञान देती हैं और कुछ ऐसी होती हैं जो हड्डियों की गिनती दोबारा करा देती हैं। करेजा करड़ करड़ करे लगता है।डाल्टनगंज से औरंगाबाद की मेरी बस यात्रा तीसरी श्रेणी में आती है। ड्यूटी से गिरते हांफते बस स्टैंड पह
Read Moreमजनू भाई का नया शाहकार।
खैनी रगड़ते हुए मधेसर चा बोले, देख रहे हो बगेदन - दीवार पर ऊपर गाँधी जी मुस्कुरा रहे हैं। ऐसा लग रहा है जैसे कह रहे हों “हे राम, का यही सब के लिए हम अंग्रेज को यहां से भगाएं थे?” बगल में राष्ट्रपति जी शांति से देख रही हैं, जैसे उनका अगला पद्मश्री साक्षात्
Read Moreकॉकरोच पार्टी जिंदाबाद।
बक मर्दे, जिस देश में देश की महिलाओं का सबसे बड़ा दुश्मन कोकरोच होता है, उसी देश में चार दिन से कोकरोच देश बदलने की बात कर रहे हैं। बाप का चार चप्पल तुम्हारा सारा भूत उतार देगा गंदे कोकरोच। तुम वही कोकरोच हो न रे, जो रेल के शौचालय में आपन
Read Moreमेलोडी खाओ, खुद जान जाओ।
ऊ दिन हम बाबू साहेब के चाय दुकान पर बैठल थे। बरसात के बाद कीचड़ ऐसा पसरा था जैसे सरकार का वादा चुनाव के बाद फैल जाता है। सामने टीवी पर समाचार चल रहा था। एंकर अइसन चिल्ला रहा था जैसे देश की सीमा पर युद्ध नहीं, बल्कि उसकी खुद की नौकरी दांव पर लगी हो।
Read Moreराष्ट्रीय स्तर का भाग्य परीक्षण।
नीट परीक्षा अब परीक्षा कम, “राष्ट्रीय स्तर का भाग्य परीक्षण” ज्यादा लगने लगा है।हमरा गांव के लोग पहले सोचता था कि डॉक्टर बनने के लिए पढ़ाई जरूरी है। अब समझ में आया कि पढ़ाई के साथ-साथ “पेपर का जीपीएस लोकेशन” भी होना चाहिए। हमरा नाम पिंटू कुमार है।
Read Moreऑनलाइन दुकानदारी
अरे भाई साहब! ई का तमाशा चल रहा है। गांव के लोग अभी सुगा-मैना नियर "ऑनलाईन-ऑनलाईन" रटिए रहे थे कि शहर के दवा दुकान वाले भाई लोग सीधे शटर गिरा के हड़ताल पर बैठ गए! ई तो वही बात भइल कि लइका जनमल ना, आ मुंडन के तैयारी शुरू। शहर वाले कह रहे हैं कि ऑनलाईन
Read Moreनींद में लिपटे सैनिक और जागता हुआ सेनापति..
बात-बात पर हमने, अपने एक अधीनस्थ कर्मी से बोला की इस बार ब्लॉक प्रबंधक की नियुक्ति आएगी तो फॉर्म अप्लाई कर देना... वह बोली न बाबा न मुझे ऐसा सेनापति नहीं बनना जिसके सैनिक सोए हुए रहते..! हमने बोला सेनापति के सम्मानित उपाधि से ब्लॉक प्रबंधक के पद को न...
Read Moreछिपकली कभी मगरमच्छ नहीं हो सकती..!
हमारे एक सहकर्मी का एक वाक्य मुझे चिंतनशील कर दिया और कुछ लिखने पर मजबूर कर दिया। जब उन्होंने किसी बात पर कहा की छिपकल्ली को नदी में डाल देने से वह मगरमच्छ नहीं बन सकती..! दीवारों पर चिपकी हुई खूबसूरत लगती छिपकलियों की कार्यकुशलता नदी में तैरती मगर..
Read Moreबहुत बहुत बहुत सुंदर।
शीर्षक: “बहुत बहुत बहुत बहुत सुंदर… और उतनी ही लंबी मुसीबत” कार्यालय में ड्रेस कोड लागु होना था, सभी कनीय बंधु बाँधवों को ड्रेस सिला लेने को कहा गया। एक महिला से कहा गया की आप नई ड्रेस के साथ सैंपल के तौर पर एक चित्र भेजें। ताकि उससे बाकियों का अंदाजा...
Read Moreगड्ढा- ए- सड़क
छह महीने पहले मेरी पूरी बॉडी डायबिटीज के रंग में रंगी थी और आज पूरी बॉडी धूल में है। लेकिन मुझे बहुत खुशी है कि मेरा गढ़वा तरक्की के रास्ते पर चल पड़ा है। नवादा मोड़ से रंका मोड़ तक रास्ते में धूल ही धूल, गड्ढे ही गड्ढे हैं। शानदार गड्ढे—इतने शानदार कि आप
Read Moreआ बैल मुझे मार !
ट्रंप चाचा, ओ भाऊ श्री वाले ट्रंप चाचा। एगो सलाह दें, अगर बम काम नहीं कर रहा है तो क्यों नहीं हमरा देश से एकाध दर्जन डायन मंगवा लेते हो। भारत में इसका जबरदस्त क्रेज है। आऊ त आऊ, मारन क्षमता भी एकदम गारंटेड है। इसके साथ साथ हमरा देश में मुंहनोछवा, चोटीकटवा
Read Moreवलसाड़ में तीन दिवसीय आत्म उत्कर्ष ध्यान-योग शिविर एवं गुजरात गौरव सम्मान-2026 का आयोजन।
यूनिक रिकॉर्ड्स ऑफ यूनिवर्स, जो कि दिव्य प्रेरक कहानियाँ मानवता अनुसंधान केंद्र न्यास, ठेकमा, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश की एक इकाई है, द्वारा धराधाम अंतर्राष्ट्रीय, गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) के सहयोग से गुजरात के वलसाड़ जिले में स्थित हार्टफुलनेस योग प्रशिक्षण...
Read Moreराष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की 30 कर्मयोगी समूह दीदियों को सारनाथ एवं स्वर्वेद मंदिर का भ्रमण
भगवान बुद्ध के चार प्रमुख पवित्र स्थलों में से एक सारनाथ—ज्ञान एवं उपदेश की पावन भूमि—वास्तव में वही दिव्य स्थान है, जहाँ भाग्यशाली एवं विरले ही पहुँच पाते हैं। आजमगढ़ जिले की ठेकमा ब्लॉक की चयनित समूह दीदियाँ इस पवित्र स्थल पर पहुँचीं और वहाँ...
Read Moreबहुत हुआ सम्मान।
मैं लक्ष्मी-वंदना में व्यस्त था, हे भ्रष्टाचार प्रेरणी, हे कालाधनवासिनी, हे वैमनस्यउत्पादिनी, हे विश्वबैंकमयी, हे कष्टनिवारिणी मुझपर कृपा कर! बचपन में मुझे चवन्नी मिलती थी पर इच्छा अठन्नी की होती थी, परंतु तेरी चवन्नी भर कृपा कभी न हुई। यहाँ तक मुझमें....
Read Moreसम्मानित अशोक कुमार को राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया जाना: समर्पण सेवा और संकल्प की गौरव गाथा!
दिनांक 3 दिसंबर 2025 शिक्षा जगत के लिए एक ऐतिहासिक और प्रेरणादाई दिवस के रूप में स्मरणीय बन गया जो माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा अशोक कुमार को राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया यह सामान ने केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियां की पहचान है बल्कि समर्पण..
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