| ब्लॉग प्रेषक: | राजीव भारद्वाज |
| पद/पेशा: | व्यंग्यकार |
| प्रेषण दिनांक: | 01-01-2026 |
| उम्र: | 38 |
| पता: | गढ़वा झारखंड |
| मोबाइल नंबर: | 9006726655 |
नयका साल।
क्या क्या सोचे थे! इस बार नए साल पर चिनिया मोड़ वाले नाली में दिन भर पड़े रहेंगे, कुत्ता से मुंह चटवाएंगे। साला सब गुड गोबर हो गया। एक तारीख को बृहस्पतिवार पड़ गया। इसीलिए मुझे अंग्रेजों वाला नया साल अच्छा नहीं लगता है, नया साल तो हमारा है, चैत्र वाला। भगवान इतना ख्याल रखना कि हम सनातनियों के नव वर्ष का प्रारंभ बृहस्पतिवार से न हो।
हमको याद है एक बार नए साल का एक तारीख शनिवार को पड़ा था, और हम नहीं जा पाए थे मंदिर। परिणाम बड़ा भयंकर मिला और उसी साल मेरी शादी हो गई। मेरी आजादी पतझड़ जैसी हो गई। एक मुस्टंडा कब कायर में परिणित हो गया पता ही नहीं चला।
और तो और पिछले साल मुझे तीन लोगों ने नये साल की शुभकामनाए दी, उन तीनों का खेत शहर के रंगदार कब्जिया लिए।
दो साल पहले मुझे चार लोगो ने शुभकामनाए दी थी उन सभी की गर्लफ्रेंड की शादी कहीं और हो गई।
तीन साल पहले मुझे 5 लोगो ने शुभकामनाए दी थी उन सभी का उम्र निकल गया कोई एग्जाम तक नहीं निकाल पाए।
चार साल पहले मुझे दो लोगो ने शुभकामनाए दी थी उन दोनों पर दहेज उत्पीड़न का केस चल रहा है कोर्ट में।
पाच साल पहले मुझे तीन लोगो ने शुभकामनाए दी थी उनका नाम हरिजन एक्ट में आ गया था।
छ साल पहले मुझे दो लोगो ने शुभकामनाए देकर उस संदेश को मिटा दिया था। आज उनके पास अमरीका की नागरिकता हैं।
कहते हैं कि "पवित्र हृदय से निकली प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती"। प्रार्थना तो किए थे कि बॉलीवुड का टॉप एक्टर बन जाऊं लेकिन रामलीला का जामवंत बन कर रह गया। प्रार्थना किए थे अंबानी जैसा ससुर मिल जाए लेकिन किस्मत देखिए कि ससुर साहब को रफी और उनके दर्द भरे गीतों से फुर्सत नहीं मिलता।
अब रामसूरत को ही लीजिए पिछले साल एक जनवरी को मदिरा का सेवन करके बाइक पर हवा लेने निकले थे, एक कुत्ता का टकराया की एक साल तक कोमा में रहें। 28 दिसंबर को होश आया और होश में आते ही जिद करने लगें नए साल का पार्टी मनाने को। भगवान सद्बुद्धि दें। सबसे आकर्षक मुझे दैनिक समाचारपत्र लगता है। आज ही एक वरिष्ठ संपादक आज होने वाले दुर्घटनाओं का टारगेट जिला के पत्रकार को दे रहे थें, शायद 15 था। और यकीन मानिए दो चार ज्यादा होगा कम की संभावना कम ही दिख रही है क्योंकि आज मैने शराब दुकान का भी अवलोकन किया, नब्बे के दशक में जिस प्रकार सिनेमाघर के टिकट काउंटर पर भीड़ होती थी, वही भीड़ आज वहां लगी थी।
ऊपर से रोड बनाने वाले नामुराद, घर के पास ही गड्ढा खोद दिए हैं, बगल के वकील चा तीन दिन से लगातार उसमें गिर रहे हैं। आज गिरे तो डाक्टर चार दिन में सेटल करने का बात कह रहा है और रोड बनाने वाले तीन दिन में सेटल कर रहा है। रोड बनाने वालों तुम्हारे घर में कोई पियांक और बेवड़ा नहीं है क्या, थोड़ी तो शर्म करते।
नए साल का पहला दिन मजनुओं का होता है, मजनू लैला के प्यार में दीवाने एक व्यक्ति का नाम था। अत: अपने मूलरूप में मजनू एक संज्ञा है परंतु कालांतर में हर दीन-दुनिया से बेख़बर दुखी चेहरे वाले पुरुष से लोग कहने लगे 'यार क्या मजनू बने घूम रहे हो' और यह एक सर्वनाम बन गया। आपको समझ आ गया होगा कि मुझे थोड़ी बहुत व्याकरण भी आती है। आज अमूमन बाइक पर तीन तीन की संख्या में मजनुओं की टोली निकलती है लैला के लिए। जबकि मजनुओं को नहीं मालूम कि "लैला तेरी ले लेगी तू लिख कर ले ले"।
आज तीन मजनू को अस्पताल में भर्ती होते देखा, पता चला कि मधुर मिलाप के लिए इन्होंने टाइटेनिक 2 के नामक दवा का सेवन कर लिया था और लैला आने से मुकर गई। लैला हमेशा से मजबूर रही है, जी हां वही मजबूरी, की हमेशा गाती फिरती है "कोई पत्थर से ना मारे मेरे दीवाने को". अरे लैला मिल लेती एक बार तो मजनू को पत्थर कौन मारता।
प्रेम में नाकाम भारतीय अक्सर प्रेमरत कुत्तों को पत्थर मारते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है ये वफादार इन्हें चिढ़ा रहे हैं। वैसे भी वो तो शापित हैं लेकिन इंसान नहीं।
आज के दिन रक्तदान कराने वाले संस्था की भी चांदी रहती है, मदिरापान के बाद जज्बात और भावनाओं का संगम होता है जो सामाजिकता के चरम रक्तदान पर पहुंच कर हल्का होता है, बेवड़ो द्वारा किया गया रक्तदान दुर्घटनाओं में घायल बेवड़ों के काम आकर भाईचारा को मजबूत बनाता है।
"भोले मन मेरे, सुन मेरा कहना,
है शराफत के साथ मुश्किल खुश रहना।"
एक बात याद रखना यदि तुम्हारी नादानी से तुम्हे कुछ होता है तो इसके जद में तुम्हारा पूरा परिवार आता है।
नव वर्ष की शुभकामना।
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