| ब्लॉग प्रेषक: | राजीव भारद्वाज |
| पद/पेशा: | व्यंग्यकार |
| प्रेषण दिनांक: | 20-05-2026 |
| उम्र: | 40 |
| पता: | Nawada |
| मोबाइल नंबर: | 9006726655 |
राष्ट्रीय स्तर का भाग्य परीक्षण।
नीट परीक्षा अब परीक्षा कम, “राष्ट्रीय स्तर का भाग्य परीक्षण” ज्यादा लगने लगा है।हमरा गांव के लोग पहले सोचता था कि डॉक्टर बनने के लिए पढ़ाई जरूरी है। अब समझ में आया कि पढ़ाई के साथ-साथ “पेपर का जीपीएस लोकेशन” भी होना चाहिए।
हमरा नाम पिंटू कुमार है। गांव गढ़वा जिला का एगो छोट गांव, जहां आज भी इंटरनेट से ज्यादा तेज़ अफवाह चलता है।
बचपन से सपना था डॉक्टर बनेंगे। कारण भी बड़ा भावुक था। गांव में एक बार बुखार हुआ तो डॉक्टर साहेब तीन दिन बाद आए, तब तक मरीज खुद ठीक होकर खेत में हगने चला गया था। उसी दिन प्रण लिया था—
“अब डॉक्टर बन के गांव की सेवा करेंगे।”।
लेकिन ई नहीं पता था कि सेवा करने से पहले सिस्टम हमरा आत्मा की ऐसी सेवा करेगा कि आदमी हंसते-हंसते रो पड़े।
हम गरीब घर से हैं।
बाबूजी खेती करते हैं, लेकिन खेती भी आजकल सरकार के भरोसे चलती है,
बरसात समय पर हो जाए तो किसान भगवान को धन्यवाद देता है, नहीं हो तो बैंक वाला किसान को नोटिस देता है।
हम सुबह चार बजे उठकर पढ़ते थे।
एतना पढ़े कि गांव के मुर्गा भी हमसे कहने लगा था,
“भाई, हम सूत रहे हैं तुम्हीं बांग देते रहो”।
कोचिंग का फीस भरने के लिए मां अपना गहना गिरवी रख दी।
बाबूजी धान बेच दिए।
घर में आलू का सब्जी इतना दिन चला कि हम भी आलू जैसन हो गए। लेकिन हम भी जिद्दी थे।
पूरा गांव जब IPL देखता था, हम “मानव हृदय” पढ़ रहे होते थे।
दोस्त लोग प्रेमिका से बात करता था, हम “मेंढक का प्रजनन तंत्र” रट रहे थे।
फिर परीक्षा का दिन आया।
सेंटर पर पहुंचते ही ऐसा माहौल था जैसे देश का परमाणु बटन दबाने जा रहे हों।
गार्ड बोला “जूता उतारो!” हम उतार दिए।
“बेल्ट उतारो!” उतार दिए।
“जेब खाली करो!” जेब में था ही क्या एक पेन, एडमिट कार्ड और मां का दिया तुलसी पत्ता।
हमको लगा अब शायद कपड़ा भी एक्स-रे होगा। देश में आदमी बैंक लूट लेता है, लेकिन नीट परीक्षा में छात्र का कान तक चेक होता है।
हम अंदर गए। सामने कुछ लड़का ऐसा शांत बैठा था जैसे परीक्षा देने नहीं, उत्तर सुधारने आया हो।
एक लड़का बोला “भाई, बायो का तीसरा सेट आया है क्या?”
हम चौंक गए “तीसरा सेट? हमको त पहला भी नहीं पता!”
तभी धीरे-धीरे खबर फैलने लगी“पेपर लीक हो गया है।”
पहले लगा अफवाह होगा।
लेकिन परीक्षा खत्म होते-होते कुछ लड़का ऐसा मुस्कुरा रहा था जैसे रिजल्ट नहीं, दहेज तय करके निकला हो। हम बाहर निकले।
मां फोन करके पूछी “बेटा, परीक्षा कैसा गया?”
हम बोले “मां, हम मेहनत वाला सेट हल किए हैं… बाकी लोग शायद असली वाला। ”कुछ दिन बाद रिजल्ट आया। गांव का एक लड़का, जो साल भर “PUBG” खेलते पकड़ा जाता था, उसका 720 में 719 आ गया।
ऐसा नंबर देखकर गांव के मास्टर साहेब तक चक्कर खा गए।
बाबूजी बोले “ई वही लड़का है न जो पिछले साल मानव शरीर में किडनी तीन बताता था”
हम बोले “हां बाबूजी, अब वही डॉक्टर बनेगा।”अब हाल ई है कि गरीब छात्र किताब से कम, खबर से ज्यादा डरता है।
हम लोग पढ़ाई करते हैं, और उधर कहीं कोई “व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी” रात में पेपर का प्रसाद बांट देती है।
सरकार हर साल बोलती है “परीक्षा निष्पक्ष होगी।”
ई सुनकर अब हमको वैसा ही भरोसा आता है जैसा गांव में बिजली विभाग कहता है “बस पांच मिनट में लाइन आ जाएगी।”
सबसे मजेदार बात त ई है कि जांच कमेटी बनती है।
भारत में कोई भी बड़ा घोटाला हो, सबसे पहले कमेटी पैदा होता है।
लगता है देश में बच्चा कम, कमेटी ज्यादा जन्म ले रहा है। टीवी पर एंकर चिल्ला रहा था “देश का भविष्य खतरे में है!” हम सोच रहे थे “भविष्य त कब का खतरे में है सर, अभी बस कैमरा पहुंचा है।” मां आज भी कहती है “बेटा, मेहनत कभी बेकार नहीं जाता।” हम मुस्कुराकर कहते हैं “हां मां, मेहनत बेकार नहीं जाता…
सीधा किसी अमीर के रैंक के नीचे दब जाता है।”अब हम फिर तैयारी कर रहे हैं। सुबह उठते हैं, किताब खोलते हैं, और भगवान से बस एक प्रार्थना करते हैं— “हे प्रभु!इस बार पेपर परीक्षा केंद्र पर पहुंचे, व्हाट्सऐप ग्रुप में नहीं।” और जो इसका दोषी हो उसे अनंतकाल तक जीने का वरदान देना ताकि इस मृत्युलोक का मजा उसे आजीवन मिल सके।
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