| ब्लॉग प्रेषक: | Manish Tiwari "Sushil" |
| पद/पेशा: | विभागाध्यक्ष, समाज शास्त्र, मनिका डिग्री कॉलेज, मनिका, लातेहार, झारखंड |
| प्रेषण दिनांक: | 02-12-2025 |
| उम्र: | 40 |
| पता: | गढ़वा झारखंड |
| मोबाइल नंबर: | 6203005569 |
जलना ही तो चलना है।
आंखें धसती है धसने दे,
दुनिया हंसती है हंसने दे।
कर्तव्य पथ ना छोड़ देना,
जीवन रथ ना मोड़ लेना।
गति ऐसी हो आस न रहे,
चाहत ऐसी हो प्यास न रहे।
धुएं सी निंदा कितना ढंकेगी,
जलेगी आग वो खुद छंटेगी।
कुंभलाना एक शुरुआत है,
जल जाना अच्छी बात है।
अंदर की लौ जब बाहर आए,
धधक उठे फिर सबको हरषाए।
अब बढ़ा ताप मन को सुलझाए
फिर क्या मजाल कोई और जलाए।
बस अंगारा ही तो बनना है,
भर जीवन सबको जलना है।
मूक प्रेम में तुम राघव बनो
चंचलता ऐसी कि माधव बनो।
कामदीप की मध्यम लौ जले
जलने से ही नित तिमिर टले।
शोक संताप भी हरणा है
प्रबल जठर ही गहना है।
नित उदर क्षुधा से जलना है
जी हां जलना ही तो चलना है
जलने में आएंगी बाधा
जल कर बचा न कोई आधा।
जब सबको ही पूरा जलना है
फिर जलना ही तो चलना है।
गगन जले या जले भुवन
राह में क्षणिक न हो विचलन।
अडिग होना सभी को भाएगा
फिर मंडल फेरे लगाएगा।
दिशा किंचित न बदलना है,
बस जलना ही तो चलना है।
अरे हां चलना है तो जलना है,
समझो जलना ही तो चलना है।।
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