अति संक्षेप शोध सारांश:
किसी कार्य हेतु जो विषय लिये जाते हैं, उनका अलग ही महत्व होता है। मैंने जिस विषय का चयन किया, मुझे नहीं लगा था कि वह इतना रोचक होगा। सतगुरु कबीर और मानवता’ विषय पर मैंने अपना शोध कार्य किया है। सतगुरु कबीर साहब के दोहे तो बचपन से ही पाठ्य–पुस्तकों में पढ़े थे। मैं उनसे प्रभावित थी। शायद यही कारण था कि मानवता सम्बन्धी विचार प्रारम्भ से ही मेरे मन में थे। इसलिए यह विषय मेरे लिये उपयुक्त रहा। मेरी एक कहानी ‘सच्चा धर्म’ को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया था, ‘राष्ट्रीय पुरस्कार’, जो मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिया गया था। इसी कहानी के अन्तर्गत मेरे वास्तविक मानवतावादी दोहे भी थे अपने–अपने धर्म को बड़ा कहें सब लोग मानवता से बढ़कर न छोटा धर्म न होय। मनुष्य है हम सब, मानव धर्म हमारा छोड़ चलें हम द्वेष–द्वन्द, जगायें एकता का नारा। मानव रूप मंदिर है, मानव ही ईश्वर है; सत्य, अहिंसा, प्रेम वही इसका सूत्र है।वास्तव में आज मानव धर्म ही स्थापन करने का समय है, जिससे आधुनिक समाज बच सकता है। अन्य धर्म केवल सामाजिक बनकर रह गये हैं। अपने धर्म को श्रेष्ठ और अन्य धर्मों के विरोधी बन जाते हैं। एक–दूसरे से घृणा, आतंक करते हैं, हमेशा युद्ध को तत्पर रहते हैं, क्योंकि सबके खान–पान, बोलचाल, रहन–सहन, रीति–रिवाज अलग होते हैं।मानव धर्म ही ऐसा है, जिसमें कोई पाखण्ड नहीं, कोई दिखावा नहीं। केवल सत्य, प्रेम, दया, सेवा, श्रद्धा ही उसके उद्देश्य हैं। यही धर्म ऐसा है जो प्रत्येक मानव को जन्मजात मिलता है। माता–पिता अपने बच्चों से लाड़–प्यार करते हैं और उनका हमेशा भला चाहते हैं। बच्चों के लिए परिवार ही पहला विद्यालय है, जिसके अनुकरण पर या स्वाभाविक भावनाएँ बच्चों के मन में सत्य, प्रेम, दया, सेवा, श्रद्धा रहती हैं। इसलिए इसे हमें अपनाना चाहिए। सतगुरु कबीर ने मानवता का जो सन्देश दिया है, वह सार्वभौमिक, सार्वकालिक, वह प्रत्येक प्राणी की भलाई के लिए है। इस विषय को मैंने 6 खंडों में बाँटा है। अन्त में निष्कर्ष में निर्णय निकाला गया है। वैसे तो सभी अध्यायों में सन्दर्भ दिये हैं, किन्तु अन्त में भी सम्पूर्ण पुस्तकों–पत्रिकाओं की सन्दर्भ सूची दी गई है। — डॉ. मालती बसन्त रमोले
| शोधार्थी | डॉ. मालती बसंत रामोले |
| पता | 92 सुरेंद्र मानिक अवधपुरी, विद्यासागर कॉलेज के सामने, मध्य प्रदेश, भोपाल 462022 |
| मोबाइल नंबर | 9981775190 |
| ई-मेल | maltibasant14@gmail.com |
| प्रकार | ई-बुक/ई-पठन |
| भाषा | हिंदी |
| कॉपीराइट | हाँ |
| पठन आयु वर्ग | सभी लोग |
| कुल पृष्टों की संख्या | 110 |
| ISBN(आईएसबीएन) | |
| शोध संस्थान का नाम | दिव्य प्रेरक कहानियाँ मानवता अनुसंधान केंद्र |
| Publisher/प्रकाशक | दिव्य प्रेरक कहानियाँ, साहित्य विधा पठन एवं ई-प्रकाशन केंद्र |
| अति संक्षेप शोध सारांश | किसी कार्य हेतु जो विषय लिये जाते हैं, उनका अलग ही महत्व होता है। मैंने जिस विषय का चयन किया, मुझे नहीं लगा था कि वह इतना रोचक होगा। सतगुरु कबीर और मानवता’ विषय पर मैंने अपना शोध कार्य किया है। सतगुरु कबीर साहब के दोहे तो बचपन से ही पाठ्य–पुस्तकों में पढ़े थे। मैं उनसे प्रभावित थी। शायद यही कारण था कि मानवता सम्बन्धी विचार प्रारम्भ से ही मेरे मन में थे। इसलिए यह विषय मेरे लिये उपयुक्त रहा। मेरी एक कहानी ‘सच्चा धर्म’ को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया था, ‘राष्ट्रीय पुरस्कार’, जो मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिया गया था। इसी कहानी के अन्तर्गत मेरे वास्तविक मानवतावादी दोहे भी थे अपने–अपने धर्म को बड़ा कहें सब लोग मानवता से बढ़कर न छोटा धर्म न होय। मनुष्य है हम सब, मानव धर्म हमारा छोड़ चलें हम द्वेष–द्वन्द, जगायें एकता का नारा। मानव रूप मंदिर है, मानव ही ईश्वर है; सत्य, अहिंसा, प्रेम वही इसका सूत्र है।वास्तव में आज मानव धर्म ही स्थापन करने का समय है, जिससे आधुनिक समाज बच सकता है। अन्य धर्म केवल सामाजिक बनकर रह गये हैं। अपने धर्म को श्रेष्ठ और अन्य धर्मों के विरोधी बन जाते हैं। एक–दूसरे से घृणा, आतंक करते हैं, हमेशा युद्ध को तत्पर रहते हैं, क्योंकि सबके खान–पान, बोलचाल, रहन–सहन, रीति–रिवाज अलग होते हैं।मानव धर्म ही ऐसा है, जिसमें कोई पाखण्ड नहीं, कोई दिखावा नहीं। केवल सत्य, प्रेम, दया, सेवा, श्रद्धा ही उसके उद्देश्य हैं। यही धर्म ऐसा है जो प्रत्येक मानव को जन्मजात मिलता है। माता–पिता अपने बच्चों से लाड़–प्यार करते हैं और उनका हमेशा भला चाहते हैं। बच्चों के लिए परिवार ही पहला विद्यालय है, जिसके अनुकरण पर या स्वाभाविक भावनाएँ बच्चों के मन में सत्य, प्रेम, दया, सेवा, श्रद्धा रहती हैं। इसलिए इसे हमें अपनाना चाहिए। सतगुरु कबीर ने मानवता का जो सन्देश दिया है, वह सार्वभौमिक, सार्वकालिक, वह प्रत्येक प्राणी की भलाई के लिए है। इस विषय को मैंने 6 खंडों में बाँटा है। अन्त में निष्कर्ष में निर्णय निकाला गया है। वैसे तो सभी अध्यायों में सन्दर्भ दिये हैं, किन्तु अन्त में भी सम्पूर्ण पुस्तकों–पत्रिकाओं की सन्दर्भ सूची दी गई है। — डॉ. मालती बसन्त रमोले |
| अन्य कोई अभियुक्ति | |
| पर्यवेक्षक/मार्गदर्शक | Dr.Kirti Sharma |
| अपलोड करने की तिथि | 19-09-2025 |