| ब्लॉग प्रेषक: | राजीव भारद्वाज |
| पद/पेशा: | व्यंग्यकार |
| प्रेषण दिनांक: | 18-08-2026 |
| उम्र: | 37 |
| पता: | गढ़वा |
| मोबाइल नंबर: | 9006726655 |
स्पेशल 2029
अरे ई कौनो नई बात थोड़े है। गाँव-देहात से लेके फेसबुकिया शहर तक, हर जगहा अक्षय कुमार रूपी ठग अपना जाल बिछाए बैठा है।
तनी सुनो। कुछ साल पहिले एक सिनेमा आया था, स्पेशल 26। उड़ी बाबा, का गजब का सिनेमा था। एक तो ठगों का गिरोह, ऊपर से धरम-करम ऐसा कि असली सीबीआई भी हाथ मलते रह जाए। उ अक्षय कुमार मूँछ पर ताव देके काठ की कुर्सी पर बैठता था, और सामने बेरोज़गारों की कतार। टकला अनुपम खेर, जेकरा आँख में बगुले जैसा ध्यान और चेहरे पर गुरु-घंटाल वाली चमक, सबको मेंटरी झाड़ता था कि हाँ भइया, तुमको ई करना है, तुमको उ करना है। तुमको प्रखंड कल्याण पदाधिकारी बनना है, तुमको राजस्व निरीक्षण, तो तुमको आप्त सचिव।बेचारे सीधे-सादे लईके ई समझ के छाती फुलाए घूम रहे थे कि अब तो दरोगा से भी ऊँचा पद मिल गया, यानी प्रखंड स्तरीय अधिकारी।
हाय दैया , मार डाला रे, आह, अक्षयवा सबको ई पाठ पढ़ा दिया कि तुम सब अफ़सर हो। और जब असली डाका पड़ गया, माल-मत्ता समेट के उ गिरोह समंदर पार कुरुता-पाजामा पहन के कॉफ़ी का सिप मारते हुए क्रिकेट मैच देखने लगा। और ई सब 26 बेवकूफ़, बसवा में बैठल-बैठल मुँह बाए ई सोच रहे हैं कि हम तो परीक्षा पास करके अफ़सर बने हैं जी।
ई होवै है मानसिक भ्रम-जाल, मतलब दिमाग़ में अफीम का नशा।
आजकल ईहे खेल चल रहा है। उहाँ भी एक तोतला अक्षय कुमार बैठा है। लईकन को पुचकार के, दो गो मीठा बोल बोल के ठग रहा है। 30 लात दो, नौतली लो।
और अपने देहात के सीधे-सादे, नासमझ लईके भी अजबे किस्म के भकचोंधर, बुडचोंदर हैं। उ फुसलावे में आके छाती ठोकने लगते हैं कि हम तो एम्बेसडर हो गए। अरे राम-राम, ई कोई सीबीआई का डायरेक्टर थोड़े है, ई तो मुफ़्त में खटाने वाला फ्री-लेबर प्रोजेक्ट का जमादार है।
तो सुन लो भैया, गँवई बुद्धि से एक बात गाँठ बाँध लो। अगर अबकी कोई मुँह-झौंसा आके तुमको कहता है कि नौकरी लगवा देंगे तो पहले उसका इज्जत से गांव फाड़ना। इ हराम का जना सब झुनझुना थमा रहा था और तुम मगन हो के नाच रहे थे, अब तो समझ लो कि तुम सीबीआई के स्पेशल 26 नहीं, इस कलयुग के स्पेशल बुद्धू बन चुके हो। तुम्हारी बलि चढ़ चुकी है और छलिया कॉफ़ी की चुस्की ले रहा है।
जय हिंद।
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