| ब्लॉग प्रेषक: | डॉ. अभिषेक कुमार |
| पद/पेशा: | साहित्यकार व विचारक |
| प्रेषण दिनांक: | 14-04-2025 |
| उम्र: | 35 |
| पता: | ठेकमा, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश |
| मोबाइल नंबर: | 9472351693 |
ये जंगल तुम कितना खूबसूरत हो...
ये जंगल तुम कितना खूबसूरत हो,
तेरे बाहों में झूल जाने को जी चाहता है,
तेरे सीने पर स्थित गगनचुंबी पहाड़ियां,
उनसे लिपट जाने को जी चाहता है।
तेरी वादियों में सदा निवास करने को जी चाहता है,
तेरे सानिध्य में जीवन का सार खोजने को जी चाहता है।
तेरे गुलसिता में पक्षियों का कलरव, भंवरों का गुंजन,
उनसे मिलकर सुर में सुर मिलाने को जी चाहता है,
पलास और महुआ आदि पुष्पों का भीनी-भीनी सुगंध,
जिसमें अपनी मन को बेसुध कर देने को जी चाहता है।
कुहू-कुहू की स्वर-लहरी में डूब जाने को जी चाहता है,
प्रकृति के रंग-बिरंगे आंचल में खो जाने को जी चाहता है।
तुम्हारी बागों की डालियों पर लचकती चांदनी,
जहां मदहोश हो जाने को जी चाहता है,
तुम्हारे आगोश में बसंती पुरवइया बयार के सन-सन में,
बावरा होकर झूमने को जी चाहता है।
चांदनी की छाँव में सपने सजाने को जी चाहता है,
तेरे दामन में मन को मुक्त करने को जी चाहता है।
तुम्हारे चमन में खिल-खिलाती कलियों को,
गले लगा के चूमने को जी चाहता है,
अटखेलियां करते बदलो के झुंड के नीचे,
तलहटियों पर बैठ, कुछ गुनगुनाने को जी चाहता है।
फूलों की कोमलता को अपने हृदय में बसाने को जी चाहता है,
प्रकृति के इस महफिल में तेरी धुन में डूब जाने को जी चाहता है।
ये जंगल तुम कितना खूबसूरत हो,
तेरे बाहों में झूल जाने को जी चाहता है,
तेरे सीने पर स्थित गगनचुंबी पहाड़ियां,
उनसे लिपट जाने को जी चाहता है।
तेरी सुंदरता में ही जीवन का अर्थ ढूंढने को जी चाहता है,
तेरे साथ एक अनंत यात्रा पर निकलने को जी चाहता है।
डा. अभिषेक कुमार
साहित्यकार, प्रकृति प्रेमी व विचारक
मुख्य प्रबंध निदेशक
दिव्य प्रेरक कहानियाँ मानवता अनुसंधान केंद्र
श्रेणी:
— आपको यह ब्लॉग पोस्ट भी प्रेरक लग सकता है।
नए ब्लॉग पोस्ट
18-08-2026
स्पेशल 2029
अरे ई कौनो नई बात थोड़े है। गाँव-देहात से लेके फेसबुकिया शहर तक, हर जगहा अक्षय कुमार रूपी ठग अपना जाल बिछाए बैठा है। तनी सुनो। कुछ साल पहिले एक सिनेमा आया था, स्पेशल 26। उड़ी बाबा, का गजब का सिनेमा था। एक तो ठगों का गिरोह, ऊपर से धरम-करम ऐसा कि असली सीबीआई
Read More15-08-2026
मैं आजाद हूं।
मैं आजाद हूँ । गाँव के पूरब टोले में पीपल का पुराना ठूंठ आज फिर बहस की वेदी बना हुआ था। सिरकाही धूप में मधेसर चा अपनी पुरानी लाठी पर दोनों हाथ टिकाए, खंखारते हुए बोले, अरे भइया, हम तो कहते हैं कि देस में अजादी का बयार बह रहा है। अब देखो न, हमारे ज़माने
Read More11-08-2026
नियंत्रण : सृष्टि के संतुलन का अदृश्य सूत्र
नियंत्रण, सृष्टि संतुलन का मूल रहस्य है। जैसे-जैसे कलयुग गहराएगा इंसानियत, मानवता इतना अनियंत्रित हो जाएगा कि उस पर नियंत्रण हेतु सुपर क्वांटम युक्त कृत्रिम बुद्धिमता प्रणाली के मशीन ही एकमात्र उपाय है।
Read More25-07-2026
आइए न हमरा बिहार में।
धरना नहीं, महामेला! सड़क किनारे का वह मैदान आज केवल धूल-धक्कड़ का ढेर नहीं था, उसमें लोकतंत्र की सुराही छलक रही थी। चारों तरफ गोंदली के पत्तों जैसी चंचल भीड़। यह कोई गुस्सा या विरोध का अखाड़ा नहीं था, ई तो गाँव-जवार का महापरब था। दिल्ली-पंजाब वाले जिसे
Read More17-07-2026
धर्म क्या है ?
आस्था है ब्रह्मांड का अस्तित्व है धर्म जन्म के जीवन की दिशा दृष्टिकोण निर्धारण करने का मार्ग है या जन्म जीवन के सत्यार्थ बोध का सत्य है। धर्म ईश्वरीय सत्य का विज्ञान है या आचरण एव संस्कार निर्माण का पथ सिद्धांत है। सर्व प्रथम यह जानना आवश्यक है कि धर्म..
Read More