| ब्लॉग प्रेषक: | Sanjeev Kumar |
| पद/पेशा: | Student |
| प्रेषण दिनांक: | 13-05-2023 |
| उम्र: | 28 |
| पता: | 7 no. Jellia para lane FAZIRBAZAR |
| मोबाइल नंबर: | 08820799140 |
इंसानियत
ये अपनो की करतूत जब अपनो को ही वापस करता हूं तब पता नही क्यों उन्हें बुरा मैं लग जाता हूं
इन्सान हूं ,
इन्सानियत की बात करता हूं,
अच्छे के लिए अच्छा हूं ,
होशियारों के लिए थोड़ा होशियार भी हूं ,
समाज में ज्ञान देना पर खुद पाप करना वैसे लोगो से दूरी बना कर रहता हूं
गन्दी सोच रखने वालो इंसानों से इंसानियत का ढोंगी चाल भी चलता हूं ,
इन्सान हूं ,
इन्सानियत की बात करता हूं,
समझने वाले समझते हैं , कहने वाले कहते भी है ,
पर क्या करू अपनी आदतों से लाचार भी हूं ,
इन्सान हूं ,
इन्सानियत की बात करता हूं,
जिनकी तलाश थी वो मिले नही और जो मिले उनकी कभी तलाश थी ही नही ,
ना बड़ो का साया न ही अपनो का सहारा ईस सर्कस की दुनिया में सारे अभिनय खुद ही करता हु ,
इन्सान हूं ,
इन्सानियत की बात करता हूं,
दुख, दर्द , तकलीफ और अपनो की खुशियों के बोझ के तले दबा हुआ इंसान हूं ,
फिर भी हस्ता हूं, मुस्कुराता हूं और ❤️ 👏🏻प्रभु श्री राम👏🏻 का जाप करता हु
क्या करू
इंसान हूं
इंसानियत की बात करता हूं
इन्सान हूं ,
इन्सानियत की बात करता हूं,
— आपको यह ब्लॉग पोस्ट भी प्रेरक लग सकता है।
नए ब्लॉग पोस्ट
18-08-2026
स्पेशल 2029
अरे ई कौनो नई बात थोड़े है। गाँव-देहात से लेके फेसबुकिया शहर तक, हर जगहा अक्षय कुमार रूपी ठग अपना जाल बिछाए बैठा है। तनी सुनो। कुछ साल पहिले एक सिनेमा आया था, स्पेशल 26। उड़ी बाबा, का गजब का सिनेमा था। एक तो ठगों का गिरोह, ऊपर से धरम-करम ऐसा कि असली सीबीआई
Read More15-08-2026
मैं आजाद हूं।
मैं आजाद हूँ । गाँव के पूरब टोले में पीपल का पुराना ठूंठ आज फिर बहस की वेदी बना हुआ था। सिरकाही धूप में मधेसर चा अपनी पुरानी लाठी पर दोनों हाथ टिकाए, खंखारते हुए बोले, अरे भइया, हम तो कहते हैं कि देस में अजादी का बयार बह रहा है। अब देखो न, हमारे ज़माने
Read More11-08-2026
नियंत्रण : सृष्टि के संतुलन का अदृश्य सूत्र
नियंत्रण, सृष्टि संतुलन का मूल रहस्य है। जैसे-जैसे कलयुग गहराएगा इंसानियत, मानवता इतना अनियंत्रित हो जाएगा कि उस पर नियंत्रण हेतु सुपर क्वांटम युक्त कृत्रिम बुद्धिमता प्रणाली के मशीन ही एकमात्र उपाय है।
Read More25-07-2026
आइए न हमरा बिहार में।
धरना नहीं, महामेला! सड़क किनारे का वह मैदान आज केवल धूल-धक्कड़ का ढेर नहीं था, उसमें लोकतंत्र की सुराही छलक रही थी। चारों तरफ गोंदली के पत्तों जैसी चंचल भीड़। यह कोई गुस्सा या विरोध का अखाड़ा नहीं था, ई तो गाँव-जवार का महापरब था। दिल्ली-पंजाब वाले जिसे
Read More17-07-2026
धर्म क्या है ?
आस्था है ब्रह्मांड का अस्तित्व है धर्म जन्म के जीवन की दिशा दृष्टिकोण निर्धारण करने का मार्ग है या जन्म जीवन के सत्यार्थ बोध का सत्य है। धर्म ईश्वरीय सत्य का विज्ञान है या आचरण एव संस्कार निर्माण का पथ सिद्धांत है। सर्व प्रथम यह जानना आवश्यक है कि धर्म..
Read More