| ब्लॉग प्रेषक: | पीयूष गोयल |
| पद/पेशा: | मिरर लेखक |
| प्रेषण दिनांक: | 08-03-2023 |
| उम्र: | 56 |
| पता: | Greater Noida |
| मोबाइल नंबर: | 9654271007 |
…. और वो एक कम्पनी का “COO” बन गया.
मैं अपने तीनों भाइयों में सबसे बड़ा और एक मध्यम वर्गीय परिवार में पला बड़ा हुआ, पिता जी द्वितीय श्रेणी के सरकारी कर्मचारी,मेरे पापा की पोस्टिंग मथुरा के एक गाँव में थी. चुकि हम तीन भाई थे ……बहन न होने के कारण माता जी के साथ घर के काम में हाथ बटाना पड़ता था, अब मैं घर में सबसे बड़ा था ज़िम्मेदारी मेरी सबसे ज़्यादा थी,सच बताऊँ घर में बहन का होना बहुत ज़रूरी हैं जब हम तीनों भाई साथ में होते हैं तो यही सोचते थे हमारे बहन क्यों नहीं हैं? जैसे-जैसे समय गुजरता रहा मेरे पापा का ट्रान्सफ़र मथुरा के ही दूसरे गाँव में हो गया,मैं अपनी पढ़ाई के लिए हॉस्टल चला गया, कुछ समय बाद मेरा छोटा भाई( बीच वाला) अपनी पढ़ाई के लिए घर से दूर चला गया,अब घर पर सिर्फ़ माता जी,पिता जी व सबसे छोटा भाई रह गये.जब कभी भी हम सभी त्यौहार पर घर पर इकट्ठे होते थे.छोटे भाई को देखकर मज़ाक़ भी करते थे और कई बार भाई को देख कर ये भी सोचते थे इसको भी पढ़ना चाहिए और साथ ही साथ ये भी सोचते थे माता जी कि उम्र हो रही हैं माता जी के साथ कोई ना कोई तो होना चाहिए. एक दिन हमें खबर मिली की हमारा छोटा भाई घर से भाग गया हैं. मैंने किसी तरह से घर पकड़ा घर पर पहले से ही मेरा बीच वाला भाई भी था, वो मेरे से पहले पहुँच गया.(उन दिनों मोबाइल नहीं हुआ करते थे), घर पर सब परेशान समान इधर-उधर फैला हुआ पड़ा था.रात को जब सब लोग साथ बैठे हुए थे मैंने माता जी व पिता जी से पूछा आप लोगों ने तो कुछ नहीं बोल दिया उसको,पिता जी बोले मेरा तो मतलब ही नहीं हैं,कुछ कहने का ….हाँ माता जी एक दम बोली, मैंने उस से एक बात बोली थी जब वो कमरे में पोछा लगा रहा था मैंने उस से कहा तू भी पढ़ लिख ले नहीं तो तू ऐसे ही पोछा लगता रहेगा,मैं तपाक से बोला अरे माता जी आप ने ये क्या कह दिया पता हैं वो कितना ग़ुस्से वाला हैं और भावुक हैं,शायद ये ही बात उसको लग गई,ख़ैर कोई बात नहीं, सुबह होने दो ढूँढते हैं उसको …. अगले दिन सुबह-सुबह दरवाज़े पर घंटी बजी मैंने जैसे ही दरवाज़ा खोला,मेरा सबसे छोटे वाला भाई सामने खड़ा था,पैर पकड़ कर बोला भैया मुझे माफ़ करना और गले लग कर बहुत रोया और रोते-रोते बोला भैया मुझे भी पढ़ना हैं घर में पोछा लगाते-लगाते थक गया हूँ.माता जी एक दिन मेरे से बोली तू भी पढ़ लिख ले नहीं तो ऐसे ही पोछा लगता रहेगा. भैया मैं कह नहीं पाया और मैं बिना बताएँ घर से चला गया मुझे आप सब माफ़ करना.छोटे बेटे और भाई को देख कर सब खुश हो गये … सबके पैर पकड़ कर माफ़ी माँगी … फिर उसके बाद उसने इतनी लगन से पढ़ाई की ….उसने एक नामी इंस्टिट्यूट में MBA की पढ़ाई की, लव मैरिज की, माता जी की एक छोटी सी बात ने उसके अंदर पढ़ाई की ऐसी लगन लगाई … वो बाद में बड़ी कंपनी के COO पद तक पहुँच गया. और मज़े की बात दोनों बड़े भाई अपना-अपना व्यापार कर रहे हैं …. और वो एक कंपनी का COO बन गया.
श्रेणी:
— आपको यह ब्लॉग पोस्ट भी प्रेरक लग सकता है।
नए ब्लॉग पोस्ट
18-08-2026
स्पेशल 2029
अरे ई कौनो नई बात थोड़े है। गाँव-देहात से लेके फेसबुकिया शहर तक, हर जगहा अक्षय कुमार रूपी ठग अपना जाल बिछाए बैठा है। तनी सुनो। कुछ साल पहिले एक सिनेमा आया था, स्पेशल 26। उड़ी बाबा, का गजब का सिनेमा था। एक तो ठगों का गिरोह, ऊपर से धरम-करम ऐसा कि असली सीबीआई
Read More15-08-2026
मैं आजाद हूं।
मैं आजाद हूँ । गाँव के पूरब टोले में पीपल का पुराना ठूंठ आज फिर बहस की वेदी बना हुआ था। सिरकाही धूप में मधेसर चा अपनी पुरानी लाठी पर दोनों हाथ टिकाए, खंखारते हुए बोले, अरे भइया, हम तो कहते हैं कि देस में अजादी का बयार बह रहा है। अब देखो न, हमारे ज़माने
Read More11-08-2026
नियंत्रण : सृष्टि के संतुलन का अदृश्य सूत्र
नियंत्रण, सृष्टि संतुलन का मूल रहस्य है। जैसे-जैसे कलयुग गहराएगा इंसानियत, मानवता इतना अनियंत्रित हो जाएगा कि उस पर नियंत्रण हेतु सुपर क्वांटम युक्त कृत्रिम बुद्धिमता प्रणाली के मशीन ही एकमात्र उपाय है।
Read More25-07-2026
आइए न हमरा बिहार में।
धरना नहीं, महामेला! सड़क किनारे का वह मैदान आज केवल धूल-धक्कड़ का ढेर नहीं था, उसमें लोकतंत्र की सुराही छलक रही थी। चारों तरफ गोंदली के पत्तों जैसी चंचल भीड़। यह कोई गुस्सा या विरोध का अखाड़ा नहीं था, ई तो गाँव-जवार का महापरब था। दिल्ली-पंजाब वाले जिसे
Read More17-07-2026
धर्म क्या है ?
आस्था है ब्रह्मांड का अस्तित्व है धर्म जन्म के जीवन की दिशा दृष्टिकोण निर्धारण करने का मार्ग है या जन्म जीवन के सत्यार्थ बोध का सत्य है। धर्म ईश्वरीय सत्य का विज्ञान है या आचरण एव संस्कार निर्माण का पथ सिद्धांत है। सर्व प्रथम यह जानना आवश्यक है कि धर्म..
Read More