| ब्लॉग प्रेषक: | अभिषेक कुमार |
| पद/पेशा: | साहित्यकार, प्रकृति प्रेमी व विचारक |
| प्रेषण दिनांक: | 01-01-2023 |
| उम्र: | 33 |
| पता: | आजमगढ़, उत्तर प्रदेश |
| मोबाइल नंबर: | 9472351693 |
दिव्य प्रेरक कहानियाँ भारतीय भाषा समन्वय एवं सहयोग परिषद का गठन...
दिव्य प्रेरक कहानियाँ
भारतीय भाषा समन्वय एवं सहयोग परिषद
Indian Language Coordination & Help Council
गठन
आज दिनांक 31/12/2022 को सद्गुरु कबीर आश्रम सेवा संस्थान, बड़ी खाटू, नागौर, राजस्थान के महंत श्री डॉ. नानक दास जी महाराज के संरक्षण मार्गदर्शन में भारत साहित्य रत्न श्री अभिषेक कुमार (जयहिन्द तेंदुआ, औरंगाबाद, बिहार) के द्वारा "भारतीय भाषा समन्वय एवं सहयोग परिषद" गठन के आधिकारिक घोषणा की जाती है। यह "दिव्य प्रेरक कहानियाँ" साहित्यिक सामाजिक वैचारिक चेतना मंच और अखिल भारतीय कबीर मठ के बैनर तले पूरे भारतवर्ष में विभिन्न भाषाओं के साझा समन्वयन, साहित्यिक अनुवाद, सामाजिक सहयोग, उत्थान एवं धर्म संस्कृति, नैतिकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्य करेगी।
भारत ऐसा एकमात्र देश है जहाँ पूरे विश्व का दर्शन है और भिन्न-भिन्न सभ्यता संस्कृति बोली भाषा और विविधता होने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता अखंडता के सूत्र में अनादिकाल से बंधा हुआ था और है। इसीलिए यह देश विश्व गुरु के नाम से विख्यात हुआ। वर्तमान समय के कलुषित वातावरण में जाती-पाती, धर्म-सम्प्रदाय का ऊँच-नीच, भेद-भाव मानवता को शर्मसार कर रही है ऐसे में विद्वान वर्ग के जिम्मेदारियां अहम हो जाती है की अपने लेख, कविता, कहानी एवं साहित्य सृजन के माध्यम से समाज को सही आईना दिखाने का काम करें क्यों कि वे ईश्वर द्वारा भेजे गए वे विशेष दूत हैं जैसा कि योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भागवत गीता के 10 वें अध्याय में कहे हैं। विश्व में भारत की सभ्यता संस्कृति एवं भाषा का इतिहास स्वर्णिम रहा है परंतु वर्तमान में भाषा और संस्कृति के वाहक लेखन और साहित्यकारिता के प्रति लोगों में रुचि दिन प्रतिदिन कम होती चली जा रही है। साहित्य से ही सामाजिक मनोवृत्ति में बदलाव एवं धर्म न्याय संगत विकास सम्भव है। पुस्तके मन में उठने वाले उमंगो को चाँद से स्पर्श करा सकती है। पुस्तक पठन लेखन से यदि नाता जोड़ा जाए तो निःसंदेह हृदयस्थ छुपे शत्रुओं का अंत होगा और व्यक्ति की उत्तम सोच से उसी के अनुरूप प्रकृति भी सृजन करेगी।
भारतीय संविधान ने मुख्य रूप से 22 भाषाओं को मान्यता दी है। देश के भीतर लगभग क्षेत्रीय स्तर पर 1000 से अधिक भाषाएँ बोली जाती है। जब हम एक दूसरे भाषा क्षेत्र वाले लोगो के बारे में जानेंगे समझेगें और उनकी मान्यताओं से कुछ अच्छी चीजें लेकर अपनी जीवन, समाज में ग्रहण करेंगे तो निःसंदेह वह मानवतावाद की सर्वोच्चता के शिखर होगा।
आज भारत वर्ष में एकता, अखण्डता, संप्रभुता, सौहार्द, प्रेम सगयोग के स्थापना हेतु भारत के विभिन्न भाषाओं के बीच समन्वयन स्थापित करना महत्वपूर्ण आयाम है। सभी भाषाओं के विद्वान तथा मातृ भाषा के अलावा अन्य भाषाओं के जानकार अनादि काल से इस वसुंधरा पर आते रहे हैं और अपने-अपने लेखन कौशल से राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानव समाज को सींचते रहे हैं।
भारत में जितनी भाषाएँ हैं उनके विद्वानों और साहित्यकारों को "दिव्य प्रेरक कहानियाँ" भारतीय भाषा समन्वय एवं सहयोग परिषद के तहत जोड़ा जाएगा और एक दूसरे के सहयोग से भिन्न-भिन्न क्षेत्रो के सभ्यता संस्कृति रीति रिवाजों तथा प्रेरक कहानियों को एक दूसरे भाषाओं में अनुवाद कर देश के प्रत्येक पाठक वर्ग तक पहुंचाया जाएगा जिससे समाज एवं देश का भला हो तथा आधुनिक भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित हो। अनुवाद के क्षेत्र में कार्यरत विद्वानों के लिए सरकार के तरफ से कोई ठोस प्रोत्साहन एवं धनराशि मुहैया नहीं कराई जाती, हाँ साहित्य के क्षेत्र में सरकारी अनुदान की जो योजनाएं है उससे एक बड़ा लेखक वर्ग आज भी अछूता है। लेखको एवं साहित्य सृजन से संबंधित सरकारी योजनाएं एवं प्रोत्साहन का भरमार रहे जैसे अन्य विभागों कार्यक्रमों में देखने को मिलता है तो यह राष्ट्र कल्याणकारी निर्णय एवं ऐतिहासिक पहल होगा जिससे सरकार एवं लेखक दोनों को बल मिलेगा। आखिर सरकार के नीति निर्देशक तत्व पॉलिसी का जो विद्वान निर्माण करते हैं वह भी एक लेखक के ही श्रेणी में आते हैं। बहरहाल जब तक ऐसी कोई ठोस कार्यनीति जब तक सरकार की तरफ से पेशकश नहीं कि जाती हम आपसी सहयोग से भी इस क्षेत्र के समस्या को हल कर सकते हैं। इस उद्देश्य से पिछले वर्ष 2021 जून में साहित्यकार श्री अभिषेक कुमार द्वारा दिव्य प्रेरक कहानियाँ साहित्य विधा पठन एवं ई-प्रकाशन केंद्र का स्थापना किया गया था जिसका मकसद भारी-भरकम पुस्तक निर्माण,प्रिंट, डिजाइन, मुद्रण और प्रकाशन से संबंधित अत्यधिक खर्चे को शून्य करना था। जो वास्तव में यह सुलभ भी हो पाया इस वैश्विक वैचारिक चेतना मंच के माध्यम से हज़ारो लेखक अपनी रचनाओं कृतियों को शून्य बजट में निःशुल्क विश्व स्तर पर ISBN के साथ प्रकशित करा रहे हैं जो आधिकारिक वेबसाइट पर स्पष्ट www.dpkavishek.in दृष्टिगोचर है।
"दिव्य प्रेरक कहानियाँ" भारतीय भाषा समन्वय एवं सहयोग परिषद का उद्देश्य सम्पूर्ण भारतवर्ष के भाषा विशेषज्ञ, अनुवादक व लेखको को ऑनलाइन पटल पर निबंधित कर मानवता के कल्याणार्थ एवं वैकल्पिक रोजगार के साधन का विकल्प बनाना है। भारत भूषण महंत श्री डॉ. नानक दास जी महाराज के मार्गदर्शन में श्री अभिषेक कुमार के प्रबंध निदेशकीय दायित्व में प्रत्येक भाषा क्षेत्र के क्षेत्रीय भाषा प्रबंधक बनाया जाएगा जो अपने-अपने भाषा क्षेत्र के विद्वानों, लेखको, अनुवादको एवं पाठक वर्ग के जोड़ने का कार्य करेंगे।
अधिक जानकारी हेतु विजिट करें-www.dpkavishek.in
या कॉल करें- +91 9472351693
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