| ब्लॉग प्रेषक: | शमा परवीन |
| पद/पेशा: | लेखिका |
| प्रेषण दिनांक: | 10-10-2022 |
| उम्र: | ** |
| पता: | Bahraich Uttar Pradesh |
| मोबाइल नंबर: | ********** |
बाल कहानी- बाल विवाह
बाल कहानी- बाल विवाह
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एक प्यारा सा गाँव था। उस गाँव में एक किसान रहता था। उसकी दो बेटियाँ थी- मुन्नी और तन्नी। दोनों बेटियाँ घर के पास ही प्राइमरी विद्यालय में पढ़ती थीं।
मुन्नी कक्षा 5 और तन्नी कक्षा 4 मे थी। मुन्नी और तन्नी हमेशा समय से साथ-साथ विद्यालय जाती थी। दोनों पढ़ने-लिखने में बहुत तेज थी। सभी अध्यापक दोनों बच्चियों को बहुत मानते थे।
एक दिन अचानक दोनों बच्चियाँ विद्यालय नहीं आयी। सभी अध्यापक हैरान हुए। पूछ-ताछ करने पर भी आस-पास के बच्चों से दोनों बच्चियों के विद्यालय न आने की कोई खबर नहीं मिली।
अगले दिन भी दोनों बच्चियाँ विद्यालय नहीं आयी। तब कक्षा अध्यापिका ने मुन्नी और तन्नी के अभिभावक से फ़ोन से सम्पर्क किया।
अभिभावक ने बताया कि,"सब ठीक है, हम आपसे मिलने विद्यालय ही आ रहे हैं। आप मेरी बेटियों के गुरुजी हैं। दोनों बेटियों ने कहा है, आपको विवाह का पहला कार्ड देना है।
इससे पहले की अध्यापिका कुछ समझ पाती, फोन कट चुका था।
कुछ ही देर में मुन्नी, तन्नी की माताजी हाथों में कार्ड लिये आ गयीं और विद्यालय के सभी शिक्षकों को न्यौता देने लगी कि मुन्नी और तन्नी का विवाह अगले हफ्ते ही है। रिश्ता बड़े घर का है, ईश्वर की कृपा से बिना दहेज़ के तय हो गया है, इसलिए हम लोग भी अपने फर्ज से जल्द से जल्द अदा हो रहे हैं।
सभी अध्यापक हैरान थे, नौ-दस साल की उम्र में शादी।
सभी अध्यापकों ने मिलकर समझाया कि ये बाल विवाह है, पर मुन्नी की माँ अपनी कह कर चली गयी।
कुछ समय के लिये विद्यालय में दुःख का माहौल बन गया।
कुछ मिनटों बाद कक्षा अध्यापिका के पास मुन्नी चुपके से आयी और उसने पढ़ाई की लालसा नम आखों से जतायी।
कक्षा अध्यापिका ने मुन्नी को गले से लगा लिया।
मुन्नी को समझा-बुझाकर घर भेज दिया।
विद्यालय बन्द होने के बाद कक्षा अध्यापिका ने मुन्नी के घर जाकर अभिभावक को समझाया। बाल विवाह गैर कानूनी है। बाल विवाह समाज के लिये घातक है, अभिशाप है। बाल विवाह पाप है। आप इस पाप के भागीदार न बनें।
इतना कहकर कक्षा अध्यापिका की आँखें नम हो गयीं।
नम आँखों से हाथों को जोड़कर विनम्र विनती करते हुए दोनों बच्चियों की पढ़ाई न रूके ये निवेदन करने लगी।
दोनों बच्चियाँ भी कहने लगीं-,"माँ, पिताजी! हम पढेंगे।
इतना कहकर बच्चियाँ भी रोने लगीं।
अभिभावक को अपनी गलती पर पछतावा हुआ। उन्होंने गुरुजी से माफ़ी माँगी और विवाह करने का इरादा खत्म करते हुए दोनों बच्चियों को विद्यालय भेजने का संकल्प ले लिया। अभिभावक के इस फैसले से सभी बहुत खुश हुए।
शिक्षा
बाल विवाह एक कोढ़ की तरह है, जो सारे शरीर में फैलकर उसे कुरुप कर देता है और मानसिक रूप से विक्षिप्त बना देता है।
शमा परवीन, बहराइच (उ० प्र०)
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