| ब्लॉग प्रेषक: | शमा परवीन |
| पद/पेशा: | लेखिका |
| प्रेषण दिनांक: | 07-10-2022 |
| उम्र: | ** |
| पता: | MOH.SALARGANJ NEAR PANI TANKI BAHRAICH |
| मोबाइल नंबर: | **** |
बाल कहानी- रोहित
एक बालबाल कहानी- रोहित
-----------
रोहित अपने पिताजी से कहता है कि,"पिताजी मेरा मन बिस्किट खाने का है, आप मुझे पैसे दे दीजिए। मैं अपने लिए और छोटी बहन के लिए बिस्किट लाना चाहता हूँ।"
रोहित के पिताजी ने रोहित को दस रुपये दिये और कहा कि,"दो पैकेट बिस्किट ले आओ। एक तुम ले लेना। एक अपनी छोटी बहन को दे देना। रोहित पास की दुकान में गया। वहाँ से उसने पाँच रुपये के दो बिस्किट दस रुपये में खरीदे और घर की ओर चल दिया। घर आते वक्त रोहित का पैर फिसला और एक पैकेट बिस्किट नाली में जा गिरा। रोहित ने तुरंत नाली से बिस्किट उठा लिया। जेब से रुमाल निकालकर रोहित ने बिस्किट के पैकेट को साफ किया और घर की ओर चल दिया। घर पहुँचकर वह सोच में पड़ गया कि कौन सा बिस्किट वह अपनी छोटी बहन को दे? हालाँकि बिस्किट के पैकेट पर लगी गंदगी रोहित अपने रुमाल से साफ कर चुका था, पर रोहित को अपने अध्यापक की बात याद आ रही थी कि- जो अपने लिए पसंद करो, वही दूसरों के लिए पसंद करो। रोहित ने सोचा- यह तो अपनी छोटी बहन है। हम जो भी अपने लिए पसंद करें, वही दूसरों के लिए पसंद करें। जब मैं यह बिस्किट नहीं खा सकता तो मैं अपनी छोटी बहन को क्यों दूँ? उसने छोटी बहन को नाली में गिरा हुआ बिस्कुट न देकर साफ बिस्कुट दिया और दूसरा उसने रख दिया। उसने पिता जी से सारी बात बता दी। पिताजी ने रोहित की पीठ थपथपाई। विद्यालय के शिक्षक की भी तारीफ की और खुद जाकर दुकान से रोहित के लिए बिस्किट लाये। रोहित बिस्किट पाकर बहुत खुश हुआ।
शिक्षा
जो चीज हमें पसंद न हो, वह हमें दूसरों को देने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
शमा परवीन, बहराइच (उ० प्र०)
श्रेणी:
— आपको यह ब्लॉग पोस्ट भी प्रेरक लग सकता है।
नए ब्लॉग पोस्ट
18-08-2026
स्पेशल 2029
अरे ई कौनो नई बात थोड़े है। गाँव-देहात से लेके फेसबुकिया शहर तक, हर जगहा अक्षय कुमार रूपी ठग अपना जाल बिछाए बैठा है। तनी सुनो। कुछ साल पहिले एक सिनेमा आया था, स्पेशल 26। उड़ी बाबा, का गजब का सिनेमा था। एक तो ठगों का गिरोह, ऊपर से धरम-करम ऐसा कि असली सीबीआई
Read More15-08-2026
मैं आजाद हूं।
मैं आजाद हूँ । गाँव के पूरब टोले में पीपल का पुराना ठूंठ आज फिर बहस की वेदी बना हुआ था। सिरकाही धूप में मधेसर चा अपनी पुरानी लाठी पर दोनों हाथ टिकाए, खंखारते हुए बोले, अरे भइया, हम तो कहते हैं कि देस में अजादी का बयार बह रहा है। अब देखो न, हमारे ज़माने
Read More11-08-2026
नियंत्रण : सृष्टि के संतुलन का अदृश्य सूत्र
नियंत्रण, सृष्टि संतुलन का मूल रहस्य है। जैसे-जैसे कलयुग गहराएगा इंसानियत, मानवता इतना अनियंत्रित हो जाएगा कि उस पर नियंत्रण हेतु सुपर क्वांटम युक्त कृत्रिम बुद्धिमता प्रणाली के मशीन ही एकमात्र उपाय है।
Read More25-07-2026
आइए न हमरा बिहार में।
धरना नहीं, महामेला! सड़क किनारे का वह मैदान आज केवल धूल-धक्कड़ का ढेर नहीं था, उसमें लोकतंत्र की सुराही छलक रही थी। चारों तरफ गोंदली के पत्तों जैसी चंचल भीड़। यह कोई गुस्सा या विरोध का अखाड़ा नहीं था, ई तो गाँव-जवार का महापरब था। दिल्ली-पंजाब वाले जिसे
Read More17-07-2026
धर्म क्या है ?
आस्था है ब्रह्मांड का अस्तित्व है धर्म जन्म के जीवन की दिशा दृष्टिकोण निर्धारण करने का मार्ग है या जन्म जीवन के सत्यार्थ बोध का सत्य है। धर्म ईश्वरीय सत्य का विज्ञान है या आचरण एव संस्कार निर्माण का पथ सिद्धांत है। सर्व प्रथम यह जानना आवश्यक है कि धर्म..
Read More