| ब्लॉग प्रेषक: | सुधीर श्रीवास्तव |
| पद/पेशा: | निजी कार्य |
| प्रेषण दिनांक: | 22-09-2022 |
| उम्र: | 53 |
| पता: | गोण्डा उत्तर प्रदेश |
| मोबाइल नंबर: | 8118285921 |
पूर्वजों को नमन
व्यंग्य
पूर्वजों को नमन
**************
हम सभी पितृपक्ष में
पूर्वजों,पित्ररों को नमन करते हैं,
तर्पण, दान, श्राद्ध, पिंडदान
और बहुत याद करते हैं,
अपना कर्तव्य, परंपरा निभाते हैं।
मगर क्या हम सचमुच
पूरी ईमानदारी से ऐसा करते हैं?
या महज औपचारिकता निभाते हैं?
बड़ा विचारणीय प्रश्न है
जिसे हम सब बड़े प्यार से नजर अंदाज करते हैं।
अच्छा है कीजिए और करते रहिए
दुनियां, समाज को दिखाने के
ढकोसले करते रहिए।
आपका भला ही होगा।
क्योंकि आपके लिए भी ऐसा ही होगा
जो आप अपने जीवित पूर्वजों के साथ
अब तक करते आ रहे होंगे
वही संस्कार आपके बच्चों को भी मिल रहे होंगे।
जीवित मां, बाप, बुजुर्गो के साथ
आज क्या क्या हो रहा है?
बताने की जरूरत नहीं है,
आपकी आँखों में वो सब तैर ही रहे होंगे,
जो हम आप खुद कर रहे होंगे।
बढ़ते वृद्धाश्रम खुद हमारे कृत्यों की कहानी
हमें ही तो रोज सुना रहे हैं,
हमारे बुजुर्गों के आँख से बहते आँसू
पीड़ा से कराहते अंतर्मन
हमें बड़ी दुआ और आशीर्वाद ही दे रहे होंगे।
आखिर देंगे भला क्यों नहीं?
जब हम बंद कमरों में उनसे
जीते जी मारपीट करते
उन्हें जलील करते, उनकी उपेक्षा करते
न उनसे प्यार के दो बोल बोलते
उनके पास बैठकर अपनेपन का
अहसास तक न करा पाने का समय ही निकाल पाते।
इससे भी जब मन को तसल्ली नहीं मिलती
तो वृद्धाश्रम में छोड़ मुक्त हो जाते
जैसे चारों धाम की यात्रा का सूकून पाते
या फिर बड़ी बेसब्री से उनके मरने की प्रतीक्षा करते
और बहुत खुश होते इस बात पर
कि हम तो अपना कर्तव्य हैं निभाते।
पूर्वजों को नमन करते
श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान करते फोटो
सोशल मीडिया पर बड़ी जल्दी लगाते
लाइक, कमेंट की प्रतीक्षा करते
पूर्वजों की याद में महज अभिनय करते,
अपने कर्तव्य, परंपराओं की औपचारिकता
साल दर साल पूरी ईमानदारी से निभाते
यह सब देख हमारे पूर्वज बहुत खुश होते,
हम उन्हें नमन करें न करें
वे प्रतीक्षित भी नहीं होते
मगर इन पंद्रह दिनों में वे हमें नमन जरुर करते
उनके भी जैसे पितृपक्ष में भाग्य खुल जाते,
और हम पूर्वजों को नमन करने का ढोल पीटते।
सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा उत्तर प्रदेश
८११५२८५९२१
© मौलिक स्वरचित
श्रेणी:
— आपको यह ब्लॉग पोस्ट भी प्रेरक लग सकता है।
नए ब्लॉग पोस्ट
18-08-2026
स्पेशल 2029
अरे ई कौनो नई बात थोड़े है। गाँव-देहात से लेके फेसबुकिया शहर तक, हर जगहा अक्षय कुमार रूपी ठग अपना जाल बिछाए बैठा है। तनी सुनो। कुछ साल पहिले एक सिनेमा आया था, स्पेशल 26। उड़ी बाबा, का गजब का सिनेमा था। एक तो ठगों का गिरोह, ऊपर से धरम-करम ऐसा कि असली सीबीआई
Read More15-08-2026
मैं आजाद हूं।
मैं आजाद हूँ । गाँव के पूरब टोले में पीपल का पुराना ठूंठ आज फिर बहस की वेदी बना हुआ था। सिरकाही धूप में मधेसर चा अपनी पुरानी लाठी पर दोनों हाथ टिकाए, खंखारते हुए बोले, अरे भइया, हम तो कहते हैं कि देस में अजादी का बयार बह रहा है। अब देखो न, हमारे ज़माने
Read More11-08-2026
नियंत्रण : सृष्टि के संतुलन का अदृश्य सूत्र
नियंत्रण, सृष्टि संतुलन का मूल रहस्य है। जैसे-जैसे कलयुग गहराएगा इंसानियत, मानवता इतना अनियंत्रित हो जाएगा कि उस पर नियंत्रण हेतु सुपर क्वांटम युक्त कृत्रिम बुद्धिमता प्रणाली के मशीन ही एकमात्र उपाय है।
Read More25-07-2026
आइए न हमरा बिहार में।
धरना नहीं, महामेला! सड़क किनारे का वह मैदान आज केवल धूल-धक्कड़ का ढेर नहीं था, उसमें लोकतंत्र की सुराही छलक रही थी। चारों तरफ गोंदली के पत्तों जैसी चंचल भीड़। यह कोई गुस्सा या विरोध का अखाड़ा नहीं था, ई तो गाँव-जवार का महापरब था। दिल्ली-पंजाब वाले जिसे
Read More17-07-2026
धर्म क्या है ?
आस्था है ब्रह्मांड का अस्तित्व है धर्म जन्म के जीवन की दिशा दृष्टिकोण निर्धारण करने का मार्ग है या जन्म जीवन के सत्यार्थ बोध का सत्य है। धर्म ईश्वरीय सत्य का विज्ञान है या आचरण एव संस्कार निर्माण का पथ सिद्धांत है। सर्व प्रथम यह जानना आवश्यक है कि धर्म..
Read More