मिसाइल मैन कलाम
भारत रत्न डा.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम जी की पुण्य तिथि पर विशेष
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मिसाइल मैन कलाम
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15 अक्टूबर 1931को जन्में
रामेश्वरम, तमिलनाडु के
गरीब मुस्लिम परिवार में
कलाम धरा पर आये,
पिता जैनुलाब्दीन माता अशियम्मा
सुत कलाम को पाये।
गरीबी की छाँव में
अनेकों कष्ट सहकर
दुश्वारियों से लड़़कर
रार जैसे ठाने थे,
अभावों, असुविधाओं के बीच
हौंसले की चट्टान सदृश्य
जूनून था जज्बा था,
कुछ कर गुजरने की चाह और
जीतने के इरादा था।
गरीब मछुआरे के लाल की
आँखों में बड़ा सपना था,
बस वही सपना पतवार बन गया,
तमाम झंझावातों के बीच
सपनों को उड़ान मिल गया,
देश को अद्भुत विलक्षण कलाम रुपी
जैसे अलग ही मिट्टी का बना
होनहार लाल जमीन से उठा
तो आसमान में चमक गया।
इंजीनियरिंग, वैज्ञानिक ही नहीं
लेखक, प्रोफेसर, तो क्या
देश के प्रथम नागरिक का
गौरव भी पा गया,
फिर भी कलाम
हमेशा आम आदमी बन
जीवन बिता गया।
राजनीति का अनाड़ी होकर भी
भारत के 11वें राष्ट्रपति बन
अपनी छाप छोड़ गया
देशवासियों के दिल में
अपने को बसा गया।
जीता आपने देश का दिल
मिसाइल की दुनियां में
देश को आगे लाये,
पोखरण-2 परमाणु परीक्षण में
अटल जी की दृढ़ता संग कलाम जी
बड़ी भूमिका निभाए ।
इसरो में बतौर इंजीनियर
पृथ्वी, आकाश, नाग, त्रिशूल
मिसाइलों का आविष्कार किया,
सदा सीखते रहना का जज्बा लिए
मिसाइल मैन कलाम नाम किया ।
कलाम कभी थके नहीं, रुके नहीं
अपनी ही धुन में
निरंतर कुछ नया ही करते रहे
विफलताओं से न कभी घबराए
निराशा जिन्हें छू भी न पाई,
असफलता को सफलता में
बदलने की करामात की शिक्षा
जैसे माँ के पेट में ही
अपने कलाम ने थी पाई।
देशभक्ति की मिसाल बन
देश को नई पहचान दिलाई,
देश की संपूर्ण सुरक्षा का
इंतजाम जीवन भर
कलाम जी करते रहे,
कर्मयोगी कर्मयोद्धा विज्ञानी ने
विश्व के समक्ष भारतीयता की
अनूठी मिसाल रख दी।
भारत के सच्चे सिपाही थे कलाम
बच्चों के बहुत दुलारे थे कलाम
जीवन पर शिक्षक बने रहे कलाम
जिनमें मानवता ,सहृदयता
कूट-कूट कर भरी थी अपार।
नहीं कभी भूल पाएगा
यह भारत देश महान
जात पात ,पंथ, मजहब से दूर
भारतीयता का भाव लिए
2020 विजन लक्ष्य था
सदा ही कलाम के ख्वाबों में
रचे बसे रहे रह क्षण,
भारत रत्न सम्मान मिला
पर जैसे सम्मान भी
कलाम का पर्याय बना,
सम्मानों का भी कलाम से जुड़ना
सम्मानों का सम्मान हुआ।
निश्छल कलाम आखिरकार
अनंत आकाश में विलीन हो गये,
27 जुलाई 2015 को शिक्षा देते देते
दुनिया को अलविदा कह गये,
अपनी अमिट यादें देश और
हर देशवासी में दिल में बसा गये।
कलाम मरें नहीं है
कलाम जैसे कभी मर ही नहीं सकते,
वो जिंदा हैं अपने आविष्कारों में
शिक्षकों में, प्यारे बच्चों में।
मिसाइल मैन कलाम को
मेरा ,आपका, हर भारतवासी का
अनंत अनंत प्रणाम है,
सहृदय कलाम पर पूरे भारत को
बहुत बहुत बहुत नाज है।
👉सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
©स्वरचित व मौलिक
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