| ब्लॉग प्रेषक: | अंगद किशोर |
| पद/पेशा: | शिक्षक, इतिहासकार एवं रचनाकार |
| प्रेषण दिनांक: | 16-05-2022 |
| उम्र: | 15-01-1965 |
| पता: | जपला, झारखण्ड |
| मोबाइल नंबर: | 8540975076 |
बिखरे पड़े हैं पलामू में बुद्ध के प्राचीन अवशेष
बुद्ध पुर्णिमा के अवसर पर
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बिखरे पड़े हैं पलामू में बुद्ध के प्राचीन अवशेष
सोन एवं उसकी सहायक नदी उत्तर कोयल की घाटी में पसरा पलामू जिला में विगत ढाई हजार वर्ष से लेकर बारहवीं शताब्दी तक के बुद्ध से संबंधित अवशेष खेतों से बस्तियों तक तथा जंगलों से पहाड़ों तक बिखरे पड़े हैं। विडंबना है कि इन अवशेषों का कोई सुध लेने वाला नहीं है- न सरकार,न जनता और न बौद्ध धर्म के अनुयायी ही। यहां बिखरे बौद्ध अवशेषों में बौद्ध स्तूप, बुद्ध प्रतिमा, बौद्ध प्रतीक, बौद्ध मंदिर, बौद्ध देवी आदि उल्लेखनीय हैं।
मोहम्मदगंज प्रखंड में उत्तर कोयल नदी के दाहिने तट पर अवस्थित पुरातात्विक महत्व के गांव सहार विहरा में पक्की ईंटों से निर्मित एक टीला है,जिसके अंड भाग के गर्भ में बुद्ध का विशाल प्रतिमा स्तंभ है।इसी नदी के तट पर पंसा गढ़ है, जो पुरातत्वविद डॉ एच पी सिन्हा के अनुसार बौद्ध स्तूप है। इसके अलावा हुसैनाबाद प्रखंड के महुअरी,नील कोठी,चनकार कस्तूरी तथा झरहा टोंगरा में बौद्ध स्तूप के अवशेष विद्यमान है।
डाल्टनगंज से 25 किमी उत्तर पूरब पंडवा प्रखंड के छेछौरी गांव में एक विशाल बौद्ध मंदिर है,जिसकी ज़मीन सरकारी खतियान में बौद्ध मंदिर के नाम से प्लाट संख्या 702 में दर्ज है। अपने तल से लगभग तीस फीट ऊंचा इस मंदिर का गर्भगृह पत्थर द्वारा तथा इसका मीनार पक्की ईंटों द्वारा निर्मित है। पलामू में बुद्ध एवं बौद्ध धर्म से संबंधित प्रतिमाएं अनेक स्थानों से प्राप्त हुई है। सहार विहरा के टीले में जमींदोज प्रस्तर स्तम्भ में उत्केरित दो मूर्तियां हैं, जिसमें एक बुद्ध की तथा दूसरी कोई देवी की प्रतीत होती है।हैदरनगर प्रखंड के सजवन गांव में सिर खंडित बुद्ध की प्रतिमा विद्यमान है, जिसे स्थानीय लोग धावर गोरया कहकर पूजा करते हैं।कबरा कलां में बुद्ध का चित्र उकेरित एक लौह फलक मिला है,जो स्टेट म्यूजियम रांची में प्रदर्शित है। हुसैनाबाद प्रखंड के सबानो गांव में बौद्ध देवी तारा की खंडित मूर्ति एक कुआं से मिली है।पंसा गढ़ से पत्थर का एक हाथी प्रतिमा मिली है, जो बुद्ध के जन्म का प्रतीक चिन्ह है। हुसैनाबाद प्रखंड के ऊपरी कलां गांव में प्रतिमा उकेरित कलाकृति युक्त प्राचीन काल का एक प्रस्तर स्तम्भ मिला है, जिसे स्थानीय लोगों ने शिव लिंग के रूप में एक मंदिर बनाकर स्थापित किया है।सच यह है कि इस प्रस्तर स्तम्भ पर उकेरित प्रतिमा बुद्ध की है। यहां के अनेक गांवों का नाम बुद्ध से संबंधित है। मसलन- बुधुआ,सजवन(सालवन से व्यूत्पन्न),हेमजा (बुद्ध का एक नाम),लूंबा (लुंबिनी से व्यूत्पन्न),तारा (एक बौद्ध देवी का नाम) आदि।
पलामू को बौद्ध सर्किट से जोड़ने के लिए प्रयत्नशील सोन घाटी पुरातत्व परिषद विगत दो दशकों से कला , संस्कृति , पुरातत्व और इतिहास को प्रकाश में लाने के लिए सोन घाटी की प्राचीन बस्तियों के उद्भेदन में लगा हुआ है।इसी साल आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया रांची के द्वारा कबरा कलां में उत्खनन कराया गया, जिसमें बुद्ध कालीन अनेक टेराकोटा के रिंग वेल मिले हैं।सोन घाटी पुरातत्व परिषद के अध्यक्ष अंगद किशोर एवं सचिव तापस डे ने संयुक्त रूप से बताया कि यह क्षेत्र बुद्ध काल में आबाद था। उस समय कबरा कलां एक समृद्ध शहर था। बुद्धकालीन प्राप्त पुरावशेषों को देखकर बुद्ध के यहां आने का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
अंगद किशोर
अध्यक्ष सोन घाटी पुरातत्व परिषद जपला पलामू झारखंड
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