| ब्लॉग प्रेषक: | स्नेहा सिंह |
| पद/पेशा: | Lecturer |
| प्रेषण दिनांक: | 16-04-2022 |
| उम्र: | 30 |
| पता: | लखनऊ, उत्तर प्रदेश |
| मोबाइल नंबर: | 9453749772 |
चुनावी कटाक्ष
। । चुनावी कटाक्ष ।।
# चुनावी सरगर्मियां चरम पर जब
आने लगती हैं । कौन सगा हैं ।
हैं कौन ,विरोधी,
ये स्वतः
इनके कारनामे बतलाने लगते हैं ।
बतलाने लगते हैं ।।
पूरे,वर्ष जो बैठे थे जनाब,
काहिल बनकर,
साधे चुप्पी ।
वो भी सीधे साधे,ईमानदार और साहसी प्रत्याशी की निष्ठा और प्रतिष्ठा को चुनौती जैसे,
दे डालने लगते हैं ।।
हाल इन विरोधी नेताओं का कुछ यूं
लगता हैं गालिब!
जैसे,बारिश के मौसम में
मेढ़क और मेढ़की अपने अपने आशियानों से निकलकर टरटाराने लगते हैं ।
लगता हैं कुछ ऐसा,
जैसे,नेक दिल और ज़मीर से जिंदा रहने वालों का भीतर से ज़मीर खंगालने लगते हैं ।।
ये,
महान विभूतियां प्रतीत होती हैं मुझे चंद लम्हों की मेज़बान की तरह ।
जो,शादी ब्याह में आकर कुछ समय के बाद जाने को लगते हैं ।
हमें,
ना होना अपने उद्देश से अलग थलग
इस वास्ते!
हमें,हो जाना हैं इनसे बहुत सतर्क ।।
चुनावी सरगर्मियां होती हैं जब चरम पर
कौन है सगा और हैं कौन विरोधी
ये,उनके कारनामे बतलाने लगते हैं ।
ये बतलाने लगते हैं ।।
स्नेहा कृति
🙏🙏🙏🙏🙏
(रचनाकर, पर्यावरण प्रेमी और राष्टीय सह संयोजक)
कानपुर उत्तर प्रदेश
— आपको यह ब्लॉग पोस्ट भी प्रेरक लग सकता है।
नए ब्लॉग पोस्ट
18-08-2026
स्पेशल 2029
अरे ई कौनो नई बात थोड़े है। गाँव-देहात से लेके फेसबुकिया शहर तक, हर जगहा अक्षय कुमार रूपी ठग अपना जाल बिछाए बैठा है। तनी सुनो। कुछ साल पहिले एक सिनेमा आया था, स्पेशल 26। उड़ी बाबा, का गजब का सिनेमा था। एक तो ठगों का गिरोह, ऊपर से धरम-करम ऐसा कि असली सीबीआई
Read More15-08-2026
मैं आजाद हूं।
मैं आजाद हूँ । गाँव के पूरब टोले में पीपल का पुराना ठूंठ आज फिर बहस की वेदी बना हुआ था। सिरकाही धूप में मधेसर चा अपनी पुरानी लाठी पर दोनों हाथ टिकाए, खंखारते हुए बोले, अरे भइया, हम तो कहते हैं कि देस में अजादी का बयार बह रहा है। अब देखो न, हमारे ज़माने
Read More11-08-2026
नियंत्रण : सृष्टि के संतुलन का अदृश्य सूत्र
नियंत्रण, सृष्टि संतुलन का मूल रहस्य है। जैसे-जैसे कलयुग गहराएगा इंसानियत, मानवता इतना अनियंत्रित हो जाएगा कि उस पर नियंत्रण हेतु सुपर क्वांटम युक्त कृत्रिम बुद्धिमता प्रणाली के मशीन ही एकमात्र उपाय है।
Read More25-07-2026
आइए न हमरा बिहार में।
धरना नहीं, महामेला! सड़क किनारे का वह मैदान आज केवल धूल-धक्कड़ का ढेर नहीं था, उसमें लोकतंत्र की सुराही छलक रही थी। चारों तरफ गोंदली के पत्तों जैसी चंचल भीड़। यह कोई गुस्सा या विरोध का अखाड़ा नहीं था, ई तो गाँव-जवार का महापरब था। दिल्ली-पंजाब वाले जिसे
Read More17-07-2026
धर्म क्या है ?
आस्था है ब्रह्मांड का अस्तित्व है धर्म जन्म के जीवन की दिशा दृष्टिकोण निर्धारण करने का मार्ग है या जन्म जीवन के सत्यार्थ बोध का सत्य है। धर्म ईश्वरीय सत्य का विज्ञान है या आचरण एव संस्कार निर्माण का पथ सिद्धांत है। सर्व प्रथम यह जानना आवश्यक है कि धर्म..
Read More